खुदा अपने खेत की
रखवाली मुझे दे दे
नज़्र करने के लिए है क्या
कुछ मन की खुरचने और जले वक्त की रोटियाँ 
तेरे खेत से बटोरा करुगी
नफरत के पीले पत्ते
दुपट्टे की हवा से उड़ाया करुँगी
दोज़ख के काले कव्वे
बदले में मेरी झोली में
मुहब्बत की फसल का
दो मुट्ठी डाल देना
हमारी आँखों से लेकर रोशनी की रुई
कातकर निकाल कुछ सुनहरे तार
बनाकर एक रोशनी की चादर,
डाल दे इस दुनिया पर
ये दुनिया वाले सदियों से
बेखौफ नींद नही सोए
बदले में अगर चाहे
तो हमारे आंसूओं को गिरवी रखले
और हमारे रूह के दिए में
ज़रा सी, बस ज़रा सी
तेल और डाल देना
sach me bahut achchha likha hai gulsarika ji..khet se batorana nafarat ke peele patte aur dupatte ki hawa se udana dojakh ke kaale kavve.. sach me bahut heart touching concept hai..I appreciate it.. like it. .and more important feel depth of your words.
ReplyDeletei loved it and i believe its straight from yre heart...really touching and worth reading...keep up the good work
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