मेरे ईश्वर और तुम्हारे खुदा के दरमियां
हम ही तो हैं
आओ इन्हें मिलाने के लिए
हम एक पूल बन जाएं
किसी ने डुबो दिया इनके वज़ूद को
गहरे स्याही में
आओ हम दोनो रौशनी की लकीर बन जाएं
मुहब्बत जमाने की मोहताज़ क्यों बने
उन्हें उठाने दो उंगलियाँ
हमारे लिबास के फर्क पर
मेरी प्राथना और तुम्हारे अज़ान पर
मेरे गीत तुम्हारे नज़्म पर
मेरे पूरब तुम्हारे पश्चिम पर
देखो .............................
इस पूरब और पश्चिम के
दोनो छोर पर
मेरा ईश्वर, तुम्हारा खुदा
अपनी उंगलियों में धागा लपेटे खड़ा है
आओ हम दोनो .........
इस धागे पर चलने वाले
नट और नटी बन जाएं
इससे पहले कि कोई चूक हो
आओ ............
एक दूसरे की हथेलियों पर
अपना-अपना दस्तखत कर दें
तुम देखो अपनी हथेली पर
कृष्ण का विराट रूप
मैं अपनी हथेली पर
नूर-ए-खुदा देखूं
तुम करो गुरुर कि
दोनो हथेलियाँ तुम्हारी हैं
मुझे हो घमंड कि
दोनो हथेलियाँ हमारी हैं
आओ.........
इन हथेलियों में ज़ख्मों के टीसते फूल लिए
दुआ करें इंसानी दुनिया में
मुहब्बत के लिए... अमन के लिए.... चैन के लिए
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